Tuesday, May 21, 2019

هل السكر ضروري للاستمتاع بكوب من الشاي؟

ربما تكون إضافة السكر لكوب الشاي أمرا معتادا بالنسبة للكثيرين، لكن العلماء يقولون إن الاستمتاع بتناوله لا يتطلب ذلك بالضرورة.
فقد توصلت دراسة بريطانية إلى أن المشاركين فيها تمكنوا من التخلص من السكر، دون أن يؤثر ذلك على استمتاعهم بالشاي، وهو ما يشير إلى أن تغيير سلوك استمر لفترة طويلة أمر ممكن.
وقال العلماء إن التوقف عن تناول السكر دفعة واحدة، أو الحد من تناوله بشكل تدريجي طريقتان فعالتان للحد من استهلاكه.
لكن معدي الدراسة أكدوا أن هناك حاجة إلى دراسة أوسع لتأكيد نتائجهم.
وقام فريق، يضم باحثين من كلية لندن الجامعية وجامعة ليدز، بتحليل بيانات على مدى شهر واحد عن 64 رجلا، اعتادوا تناول الشاي المحلى بالسكر.
وتم تقسيم المشاركين بالتساوي، إلى مجموعة من الرجال توقفوا عن تناول السكر في الشاي مرة واحدة، وآخرون خفضوا السكر تدريجيا على مدى أربعة أسابيع، ومجموعة ثالثة استمرت في تناول الشاي المحلى بالسكر.
وأشارت النتائج إلى أن الأشخاص، الذين خفضوا تناول السكر، كانوا لا يزالون قادرين على الاستمتاع بمذاق الشاي بدون السكر.
وفي نهاية الدراسة، تخلى 42 في المئة من أفراد مجموعة التخفيض التدريجي عن إضافة السكر إلى الشاي، وكذا فعل 36 في المئة من الذين توقفوا عن إضافته مرة واحدة.
واستغنى 6 في المئة من الرجال في المجموعة الثالثة عن السكر أيضا.
وخلص فريق الدراسة إلى أن "تقليل السكر في الشاي لا يؤثر على الرغبة فيه، ما يشير إلى أن تغيير السلوك طويل الأجل أمر ممكن".
وأضاف الباحثون أنه يمكن استخدام طرق مماثلة، للحد من تناول السكر في المشروبات الأخرى.
وتمت مراجعة نتائج الدراسة خلال المؤتمر الأوروبي للسمنة، في مدينة غلاسغو الاسكتلندية.
كانت جين مانشون وونغ (23 عاما) أول مَن يطّلع على تفاصيل خاصية جديدة للمواعدة والتعارف وفرها موقع فيسبوك، وذلك قبل الإعلان الرسمي عنها.
ويعد البحث عن الخصائص الجديدة للتطبيقات مجرد هواية للمهندسة الشابة جين وونغ، فهي لا تحقق مكاسب من أي سبق تنشره، رغم تلقيها عروض عمل لصالح مؤسسات إعلامية تستفيد من أخبارها.
لكن بعض ما تقدمه وونغ من أخبار يكون مهما لدرجة أنه يؤثر على سوق الأسهم.
فعندما أعلنت شركة فيسبوك، الربيع الماضي، عن خاصية جديدة للمواعدة، هبطت أسهم مجموعة ماتش غروب، التي تمتلك تطبيق المواعدة تندر وموقع ماتش.كوم، بنسبة تزيد عن 20 في المائة.
وحين نشرت المدونة الشابة، على صفحتها على تويتر، أول صورة للصفحة الرئيسية لموقع مواعدة فيسبوك  
على الرغم من كونها أحد قراصنة الكمبيوتر، إلا أنها تحاول تجنب المتاعب. حتى عندما كانت طفلة صغيرة، فإن حيلها كانت تميل إلى المزاح أكثر من كونها تشكل خطورة.
وقالت المدونة الشابة لصحيفة ساوث تشاينا مورنينغ بوست، إنها في بداية ممارستها للقرصنة كانت تتلاعب في برنامج يحسب سرعة الكتابة. ونجحت من خلال تغيير شفرة جافا سكريبت الأساسية، في اختراق البرنامج، وحققت المركز الأول في مسابقة على مستوى المدرسة.
وتدين جين مانشون وونغ، بالفضل لوالدها فيما يتعلق باهتمامها بالتكنولوجيا. ولا يعود ذلك لأنه شجعها على البرمجة، ولكن لأنه اضطرها لتعلم المهارات اللازمة حتى تتمكن من الوصول لكلمات السر التي كان يضعها لإغلاق كمبيوتر العائلة.
ومثلما كان يفعل والدها، يتعين على كبرى شركات صناعة التكنولوجيا في وادي السيليكون رفع مستوى الحماية لتجنب التعرض للاختراق من جانب أمثال هذه الشابة.
وقالت المدونة لبي بي سي: "منذ أن بدأت أحصل على بعض الاهتمام وبدأت الشركات في مراقبة تغريداتي، تعمل المزيد من الشركات على تحسين أمن تطبيقاتها".
وأضافت: "هذه إحدى النقاط التي تدفعني للقيام بهذا، فالشركات سوف تعمل على تحسين أمن التطبيق الخاص بها حتى يصعب اختراقه".
ضجة في وادي السيليكون
وتعرف الشابة أن أخبارها الحصرية تثير ضجة بين شركات التكنولوجيا، التي تقوم باختراقها بشكل منتظم.
فبعد نشرها صورة صفحة المواعدة الجديدة التابعة لفيسبوك، وجدت أن الشركة أضافت بسرعة شفرات خاصة منعتها من اقتناص المزيد من الصور باستخدام هاتفها.
وفي بعض الأحيان، تختفي سريعا الخصائص التي تعلنها عنها عبر حسابها، وهو ما حدث مع خاصية خرائط فيسبوك، بعد أن اكتشفت أنها تُظهر مواقع الأصدقاء القريبة.
كما اختفت صفحة عناوين الويب من فيسبوك، والتي كانت تكشف جميع شبكات "واي فاي"، المتاحة للجمهور في موقع معين، بعد أن نشرت تغريدة عنها.
بعد أشهر قليلة، واجهت عاصفة من التعليقات تتهمها بأنها كانت تتلاعب بالسوق من أجل تحقيق أرباح لنفسها.
وعلقت جين وونغ على هذا قائلة "لا يفهم الجميع الحوسبة وأمن المعلومات، وأحيانا يبالغ الناس في رد فعلهم عندما يرون ما أنشره".
وأوضحت أن هذه الاتهامات تسبب لها في "ثورة غضب" على تويتر. وقالت: "شعرت بالغضب الشديد".
واكتشفت أن شركة أير بي ان بي ( ) كانت تختبر خاصية جديدة تساعد على إرسال تنبيهات إلى المضيفين المشتركين بموقع الشركة لدى وصول طائرات ضيوفهم بأمان في المطارات.
وتشتهر جين مانشون وونغ، وهي مدونة متخصصة في التكنولوجيا، بالكشف عن خصائص جديدة في التطبيقات والمواقع، والإعلان عنها قبل تدشينها رسميا.
وتستطيع المدونة الشابة رصد خصائص جديدة لا تزال قيد التجربة تخص تطبيقات شهيرة مثل فيسبوك وانستغرام. وتنشر التصميمات ذات الصلة عبر حسابها على موقع تويتر، الذي يتابعه عن كثب صحفيون ينتظرون بشغف الحصول على سبق صحفي.
ولذا، بينما تسعى شركات التكنولوجيا الأمريكية في وادي السيليكون لإضفاء نوع من الإثارة عند الإعلان عن مميزات جديدة لمنتجاتها، تكرس مهندسة البرمجيات المقيمة في هونغ كونغ جهدها لتعكر صفوهم.

Monday, May 6, 2019

इसराइल-फ़लस्तीनी हिंसाः संघर्षविराम की कोशिशें भीषण झड़पें जारी

मिस्र और संयुक्त राष्ट लंबे समय के लिए संघर्ष विराम की कोशिश कर रहे थे. इसी बीच ग़ज़ा पट्टी पर झड़पें कम होने की ख़बरें भी आई हैं.
लेकिन हाल के वर्षों में ये सबसे भीषण झड़पे बताई जा रही हैं जिसमें दो दिन में चार इसराइली और 23 फ़लस्तीनियों की मौत हो गई है.
हमास टीवी स्टेशन की एक अपुष्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्षविराम के लिए दोनों पक्षों की सहमति थी लेकिन इसराइल की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय देशों ने शांति बनाए रखने की अपील की है.
इसराइल की आर्मी ने रविवार को कहा कि शनिवार से अब तक इसराइली क्षेत्र में 600 से भी अधिक रॉकेट दाग़े हैं जबकि उन्होंने इसके जवाब में 320 ठिकानों को निशाना बनाया.
रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र, क़तर और मिस्र संघर्षविराम के लिए समझौता तलाश रहे थे. सोमवार सुबह फ़लस्तीनी अधिकारियों ने बताया कि एक समझौता हुआ है.
हमास और मिस्र के अधिकारियों ने एएफपी एजेंसी को बताया कि संघर्षविराम पर सहमति बन गई है.
रविवार को इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने ग़ज़ा पट्टी में आतंकवादियों के ठिकानों पर बड़े हमले के आदेश दिए हैं.
नेतन्याहू ने कहा कि ग़ज़ा में इसराइली सेना पूरी तैयारी के साथ तैनात है. पिछले महीने संघर्षविराम पर सहमति के बाद भी संघर्ष जारी है. मिस्र और संयुक्त राष्ट्र लंबे समय के लिए संघर्षविराम की कोशिश कर रहे थे.
शुक्रवार को ग़ज़ा में नाकेबंदी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहा था. इसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की. इसराइल का कहना है कि वो चरमपंथियों के पास हथियारों को पहुँचने से रोकना चाहता है.
इसी प्रदर्शन में एक फ़लस्तीनी बंदूक़धारी ने दो इसराइली सैनिकों को सरहद पर लगी बाड़ के पास गोली मारकर ज़ख़्मी कर दिया था. इसके बाद इसराइल ने हवाई हमला कर दो चरमपंथियों को मार दिया. इसके बाद से दोनों तरफ़ से हमले जारी हैं. इसमें इसराइल के कुछ गांव भी प्रभावित हुए हैं.
उत्तरी ग़ज़ा से 10 किलोमीटर दूर अशकेलोन के अस्पताल में पिछले 24 घंटों में 100 नागरिकों को इलाज के लिए भर्ती किया गया है. इनमें से तीन की मौत हो गई है और तीन गंभीर रूप से ज़ख़्मी हैं.
चुनाव आयोग ने रमज़ान के दिनों में मतदान के लिए समय में किसी बदलाव से इनकार कर दिया है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में वकील मोहम्मद निज़ामुद्दीन पाशा और असद हयात ने रमज़ान में पड़ने वाले तीन चरण के मतदान के समय में बदलाव के लिए याचिका दायर की थी.
इस याचिका में कहा गया था कि भीषण गर्मी और रमज़ान के उपवास को देखते हुए मतदान सुबह सात बजे के बजाए सुबह साढ़े चार या पांच बजे से कराना चाहिए ताकि लोगों को कम मुश्किलें आएं.
भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने पिछले गुरुवार को चुनाव आयोग से इस मामले पर फैसला लेने का कहा था. लेकिन चुनाव आयोग ने बाक़ी के तीन चरणों में मतदान के समय सीमा में किसी बदलाव से इनकार किया है.
चुनाव आयोग के मुताबिक़ कोशिश की गई है कि चुनाव शुक्रवार को नहीं पड़े लेकिन समय सीमा में बदलाव करना संभव नहीं है.
भारत में रमज़ान मंगलवार से शुरू हो रहे हैं.
मोदी सरकार का पांच साल में ख़राब प्रदर्शन- मनमोहन सिंह
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार के पांच साल के कामकाज की आलोचना की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में मनमोहन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर मोदी सरकार का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है क्योंकि पांच सालों में आतंकवाद की घटनाएं काफ़ी बढ़ी हैं.
उन्होंने मोदी सरकार के कार्यकाल को युवाओं, किसानों, व्यापारियों और हर संवैधानिक संस्था के लिए दर्दनाक और विनाशकारी बताया.

Thursday, April 25, 2019

में तेज धूप के बीच राजनबेन

वहीं मोदी ने इसे अपने पक्ष में प्रचारित करने का कोई मौका नहीं गंवाया. उन्होंने ऐलान कर दिया, "देश सुरक्षित हाथों में है." ये मोदी के लिए किसी जीत से कम साबित नहीं हुआ और इसकी कई वजहें भी सामने हैं.
मोदी को पसंद करने वाली रेटिंग
इतने शानदार बहुमत के बावजूद मोदी के कामकाज को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दिख रही हैं. कुछ मामलों में फ़ायदा हुआ है, ज़्यादा सड़कें बन गई हैं, ग्रामीण विकास हुआ है, लोगों को सस्ती रसोई गैस दी गई है, गांवों में शौचालय बन गए हैं. एक समान बिक्री कर यानी जीएसटी लागू हो गया है.
इतना ही नहीं पचास करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य बीमा देने के लक्ष्य के साथ स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू हुई है और दिवालिया को लेकर नया कानून भी बना है. लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही है.
खेती किसानी कर रहे लोगों को अपने फसल का मामूली दाम मिल रहा है. याद रहे कि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा खेतीबाड़ी से जुड़ा हुआ है. देश में बेरोज़गारी बढ़ रही है और विवादास्पद नोटबंदी से ग़रीबों को काफी नुक़सान हुआ है.
वहीं, सामाजिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी के उग्र हिंदू राष्ट्रवाद से देश में ध्रुवीकरण बढ़ा है और अल्पसंख्यक घबराए हुए हैं. इसके साथ-साथ भारत फ़ेक न्यूज़ की महामारी की चपेट भी आ गया है.
अलग राय रखने वालों को राष्ट्रद्रोही बताने और इस आरोप में जेल भेजने तक का चलन बढ़ा है. इन सबके बीच नरेंद्र मोदी एक निर्णायक आम चुनाव का सामना कर रहे हैं.
कुछ मामलों में ये एक तरह से मोदी पर जनमत संग्रह होने वाला है. कई लोगों का मानना है कि मोदी भारत की छवि को इस रूप में ढालना चाहते हैं- 'राष्ट्रवादी', 'सामाजिक तौर पर संकीर्ण' और 'खुले तौर पर देशभक्त.'
बहरहाल 11 अप्रैल से 19 मई तक, क़रीब 40 दिनों तक चलने वाले मैराथन चुनाव में तकरीबन 90 करोड़ लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे.
ये भी कहा जा रहा है कि ये देश का सबसे बड़ा, सबसे लंबे समय तक चलने वाला और सबसे महंगा चुनाव साबित होने वाला है.
लेकिन सवाल वही है, जैसा कुछ लोग पूछ भी रहे हैं, "क्या ये चुनाव भारत की आत्मा को बचाने की लड़ाई है?"
गुजरात के वडोदरा की गलियों में तेज धूप के बीच राजनबेन धनंजय भट्ट का चुनावी अभियान जोरों पर दिखा. 56 साल की भट्ट यहां बीजेपी की उम्मीदवार हैं. वे काली चमचमाती जीप की छत से बाहर निकलकर हाथ जोड़े लोगों का अभिवादन कर रही हैं.
उनका स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे इकट्ठा हुए हैं. ये लोग उन्हें माला पहना रहे हैं, आशीर्वाद दे रहे हैं और घर में बनी मिठाइयां और जूस भी ऑफर कर रहे हैं.
जब भट्ट जीत का निशान बनाती हैं तो गली के मकानों और छतों से उन्हें उत्साहवर्धक जवाब मिलता है. पूरी गली भगवा रंग में डूबी नजर आती है. भगवा साफा बांधे, टोपी पहने, रुमाल बांधे, गमछा लगाए मोटरसाइकिल पर सवार युवा भट्ट की रैली के आगे-आगे चल रहे हैं.
एक ट्रक भी साथ में था जिसमें डीजे तेज धुनों पर संगीत बजा रहा था और आतिशबाज़ी भी देखने को मिली. कोलाहल के इस उत्सव में हर ओर से एक ही आवाज़ गूंजती है.
पार्टी के युवा समर्थक उन्मादी एक स्वर से "मोदी, मोदी, मोदी" के नारे लगा रहे हैं. ये नारे देखते-देखते बीजेपी के 2019 के चुनावी अभियान की गीत से मिल जाते हैं, ये गीत है, "मोदी है तो मुमकिन है."
पिछले कुछ समय से राज्यों में चुनाव हारने के चलते गिरावट की ओर थी. उसमें तेजी से सुधार देखने को मिला.
मोदी साल 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने, उन्होंने अपने नेतृत्व में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की बात करने वाली बीजेपी को शानदार जीत दिलाई. साल 1984 के बाद ये पहला मौका था जब किसी पार्टी को आम चुनावों में बहुमत हासिल हुआ था.

Friday, April 12, 2019

पाकिस्तानः क्वेटा में धमाका, 20 की मौत, कई घायल

पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा के हज़ारगंज इलाक़े में हुए एक आत्मघाती बम धमाके में कम से कम 20 लोग मारे गए हैं और 40 के करीब घायल बताए जा रहे हैं.
स्थानीय पुलिस के मुताबिक़ ये धमाका सुबह क़रीब आठ बजे (पाकिस्तान वक़्त के मुताबिक़) हज़ारगंज इलाक़े की सब्ज़ी मंडी में हुआ है.
समाचार एजेंसी एपीपी के मुताबिक़ पुलिस का कहना है कि धमाका बाज़ार में खड़ी पुलिस वैन को निशाना बनाकर किया गया.
डीआईजी पुलिस अब्दुल रज़्ज़ाक़ चीमा ने पत्रकारों से कहा, "इस हमले में कुल 20 लोग मारे गए हैं जिनमें से आठ हज़ारा समुदाय से हैं. एक जवान है और बाक़ी लोग मंडी में काम करने वाले हैं.".
धमाके के बारे में उन्होंने बताया, "सुरक्षाबलों की एक गाड़ी सब्ज़ी मंडी में जब आलू की एक दुकान के सामने पहुंची तब ये धमाका हुआ."
उन्होंने कहा, "धमाका आईईडी है या फिर कुछ और ये जांच के बाद पता चलेगा."
जब उनसे पूछा गया कि क्या ये आत्मघाती धमाका था तो उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है.
ये धमाका आलुओं के एक गोदाम के बाहर हुआ है. जिस समय धमाका हुआ उस समय यहां लोग काम कर रहे थे.
धमाके के बाद सुरक्षाबलों ने इलाक़े को घेरे में ले लिया है. बम निरोधक दस्ता भी मौक़े पर भेजा गया है.
इस धमाके में कई लोग घायल भी हुए हैं जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया है.
पुलिस के मुताबिक़ हज़ारगंज में हज़ारा शिया समुदाय से जुड़े लोग रहते हैं.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ मारे गए और घायल हुए अधिकतर लोग इसी समुदाय से हैं.
पाकिस्तान में हज़ारा शिया लोगों को निशाना बनाकर पहले भी हमले किए जाते रहे हैं.
विकीलीक्स के संस्थापक जुलियन असांज को गुरुवार को लंदन में इक्वाडोर के दूतावास से गिरफ़्तार कर लिया गया है जहाँ उन्होंने पिछले सात साल से शरण ली थी.
असांज ने साल 2012 से इस दूतावास में शरण ली हुई थी.
गुरुवार को असांज को वेस्टमिंस्टर कोर्ट में पेश किया गया जहां वे कोर्ट के सामने सरेंडर ना करने के दोषी पाए गए.
असांज ने अमरीकी सरकार से जुड़ा एक बड़ा ख़ुलासा किय था जिसके बाद उन पर अमरीकी सरकार के खिलाफ़ षड्यंत्र के आरोप हैं.
अमरीका के जस्टिस डिपार्टमेंट का आरोप है कि असांज ने पूर्व अमरीकी इंटेलीजेंस विश्लेषक चेल्सी मैनिंग की मदद से गोपनीय दस्तावेज़ डाउनलोड किए.
अगर असांज पर लगे ये आरोप सिद्ध होते हैं तो अमरीका में उन्हें पांच साल तक की सज़ा का प्रावधान है.
ब्रिटेन की सरकार को ये तय करना है कि वह जुलियन असांज के प्रत्यर्पण को मंज़ूरी देंगे या नहीं.
असांज की वकील जेनिफ़र रॉबिनसन ने कहा है कि वह इस प्रत्यर्पण का विरोध करेंगी.
उन्होंने कहा, ''प्रत्यर्पण की मांग के ख़िलाफ़ हूं, अगर कोई पत्रकार अमरीका के ख़िलाफ़ दस्तावेज़ के ज़रिए सच सामने लाता है तो उसे अमरीकी सरकार के आरोप झेलने होंगे. ये एक बेहद ख़तरनाक मिसाल साबित होगा.''
असांज पहले भी ये बोल चुके हैं कि अगर वो दूतावास से बाहर निकलेंगे तो उनका प्रत्यर्पण किया जा सकता है.

Tuesday, April 2, 2019

साल-दर-साल सभी राजनीतिक दल चाय बगान

असम ऐसा राज्य है जहां केवल धान की ही 250 प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनकी पारंपरिक रूप से खेती होती रही है. चावल की इन प्रजातियों में से कई लुप्त होने के कगार पर ज़रूर हैं, मगर इनको बचाने के प्रयास भी हो रहे हैं.
सिलापथार साइंस कालेज के प्रिंसिपल रंजीत सैकिया का कहना है कि सदियों से असम के किसान, धान के स्थानीय बीज का उत्पादन करते रहे थे लेकिन कुछ सालों से वो बस एक या दो प्रजाति के धन की फसल ही उपजाते हैं. इसलिए कॉलेज ने ऐसे ही बीजों का बैंक बनाया है ताकि धान की ये प्रजातियाँ संरक्षित रह पाएं.
वे कहते हैं, “ये धान असम के पारंपरिक उत्पाद हैं और ये कई प्रकार के हैं. हमने जो बैंक बनाया है उससे हम बीज विकसित कर स्थानीय किसानों में बाँट रहे हैं और उन्हें इनकी खेती करने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं. अगर इन प्रजातियों को किसान उगाने लगते हैं तो फिर हम इनका निर्यात भी कर सकते हैं और यहाँ का किसान ख़ुशहाल हो सकता है."
राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मिली चुनावी हार के बाद असम भारतीय जनता पार्टी शासित पहला ऐसा राज्य है जिसने किसानों के लिए क़र्ज़ माफ़ी की घोषणा की है.
इस क़र्ज़ माफ़ी की योजना को पथुराघाट की घटना के नाम पर बनाया गया है. असम सरकार के प्रवक्ता और मंत्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि इस योजना के तहत उन किसानों का 25 प्रतिशत कर्ज़ माफ़ किया जाएगा जो 75 प्रतिशत क़र्ज़ बैंकों को लौटा देंगे.
असम सरकार के वित्त मंत्री हेमंता बिस्वासरमा के अनुसार राज्य के सिर्फ़ 19 लाख किसानों को ही किसान क्रेडिट कार्ड का फ़ायदा मिल पा रहा है जबकि सरकारी आंकड़ों में राज्य में किसानों की संख्या 27 लाख बताई जाती है. नई क़र्ज़ माफ़ी की योजना के लिए सरकार के खज़ाने से 500 करोड़ रुपये खर्च होने हैं.
लेकिन जानकार मानते हैं कि क़र्ज़ माफ़ी की इस योजना से किसानों को ज़्यादा फ़ायदा नहीं मिल पाएगा.
वरिष्ठ पत्रकार रविशंकर रवि कहते हैं, "किसी ने एक लाख रुपये क़र्ज़ लिया और उसकी फसल किसी वजह से पूरी की पूरी बर्बाद हो गई तो वो क्या करेगा. वो क़र्ज़ के 75 हज़ार रुपये वापस करने की स्थिति में रहेगा, तब तो 25 प्रतिशत माफ़ी के लिए आवेदन देगा, जिसकी पूरी फ़सल बर्बाद हो गई वो कहाँ से क़र्ज़ चुका पायेगा?"
असम के किसानों का संघर्ष बहुत पुराना है. वर्ष 1894 में यहाँ के दर्रांग ज़िले के पथुराघाट में किसानों ने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन किया था. तत्कालीन ब्रितानी हुकूमत ने इस आंदोलन को बुरी तरह कुचल दिया था. इस संघर्ष में 140 किसान मारे गए थे जबकि 150 किसान घायल हुए थे.
हालांकि किसानों की ये कुर्बानी इतिहास के पन्नों में अपनी कोई जगह नहीं बना पाई और देश के बाक़ी के हिस्सों में इसकी कोई चर्चा नहीं सुनाई देती. ये पंजाब के जालियांवाला बाग़ के जैसा ही आंदोलन था. पथुराघाट आंदोलन की पृष्ठभूमि 1826 से ही शुरू हो गई थी जिसके पीछे 'यंदाबो समझौता' है.
पथुराघाट के निवासी और पत्रकार भार्गब कुमार दास बताते हैं कि इस समझौते के तहत बर्मा ने असम, मणिपुर और इसके आस पास के इलाकों का नियंत्रण ब्रितानी हुकूमत को सौंप दिया था.
इस समझौते के बाद क्षेत्र में 'अहोम राजाओं' के शासन की समाप्ति की घोषणा की गई. जब अंग्रेज़ों ने इलाके की हुकूमत संभाली तो उन्होंने किसानों पर लगान बढ़ा दी. ब्रितानी हुकूमत के इस फैसले के बाद ऊपरी असम में किसानों का ज़ोरदार विरोध शुरू हो गया. राजनीतिक दलों और राजनेताओं ने पथुराघाट की घटना को मानो भुला ही दिया था.
मगर वर्ष 2000 में भारतीय सेना ने इन शहीद किसानों की याद में एक स्मारक बनाया. वो भी तत्कालीन राज्यपाल जनरल एसके सिन्हा की पहल पर, तब से लेकर आज तक, हर साल 29 जनवरी को भारतीय सेना इन किसानों को श्रद्धांजलि देती आ रही है.
सवाल उठता है कि क्यों इतने सालों के बाद भी असम के किसान संघर्ष ही कर रहे हैं?
असम की राजधानी गुवाहाटी की व्यस्त चाय गली में आज भी रोज़ की तरह ही हलचल है. यहां रिक्शा और ठेलों का लंबा जाम लगा है, और राहगीरों की लंबी कतारें हैं. लोग यहाँ चाय की चुस्कियां लेने दूर-दूर से आते हैं. अलग-अलग ज़ायके की चाय इस जगह की पहचान है.
पास ही में है चाय की पत्तियों का थोक बाज़ार. यहीं से पैक होकर आपकी पसंदीदा चाय आप तक पहुँचती है. देश के कोने-कोने से चाय के व्यापारी इस चाय गली की थोक की दुकानों में आते हैं और अपना ऑर्डर देकर चले जाते हैं. फिर ये थोक विक्रेता उन तक चाय पत्ती पहुंचाते हैं.
हालांकि चाय का ये सफ़र उतना आसान भी नहीं है जितनी आसानी से हम अपनी प्याली की चाय गटक जाते हैं. लगभग दस लाख चाय के मज़दूरों की मेहनत के बाद ही हम तक ये पत्तियां पहुँच पाती है.
पहाड़ों और झरनों की गोद में फैले असम के चाय के बगान इस राज्य की प्राकृतिक सुंदरता को निखारते हैं. असम का नाम आते ही दिमाग़ में यहाँ के चाय बगानों की खू़बसूरती और सांस्कृतिक परंपरा की तस्वीर बनने लगती है.
मगर पिछले कई सालों से असम के इन चाय के बगानों में एक असंतोष पनप रहा है. ये असंतोष है मजू़रों का, जो न्यूनतम मज़दूरी और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर संघर्ष करते आ रहे हैं.

Monday, January 21, 2019

مخرج شهير في بوليوود ينفي اتهامات بالتحرش بزميلاته

نفى المخرج الشهير في السينما الهندية راجكومار هيراني الاتهامات التي وجهت إليه بالتحرش بإحدى زميلاته.
ويعد هيراني واحدا من أبرز شخصيات بوليوود التي تظهر على وسم "مي تو" الذي تنشر عليه الفتيات والسيدات ما تقلن إنها جرائم جنسية تعرضن لها.
وقالت السيدة التي لم يعرف اسمها حتى الآن إن هيراني تحرش بها جنسيا على مدار ستة أشهر كانت تعمل فيها مساعدة له ضمن طاقم عمل فيلم "سانجو".
ونشر موقع هافبوست باللغة الهندية الاتهامات الموجهة لهيراني قبل أيام، وقالت السيدة للجريدة إن هيراني تهجم عليها للمرة الاولى في منزله ثم كرر ذلك عدة مرات خلال فترة الإعداد للفيلم.
لكن هيراني نفى هذه الاتهامات جملة وتفصيلا في بيان أصدره محاميه الشخصي.
وقبل 3 أشهر نشرت هافبوست نقلا عن بريد إلكتروني ما كتبته هذه السيدة عما حدث قائلة: " لقد تعرض عقلي وجسدي وقلبي للانتهاك العنيف تلك الليلة ولستة أشهر تالية".
وقالت السيدة إنها لم تتخذ أي إجراء قانوني ضد هيراني لأنها خافت من خسارة عملها حيث كان والدها مريضا خلال تلك الفترة لذا لم يكن في مقدورها التخلي عن عملها وفقدان مصدر الدخل الوحيد للأسرة.
ونشر وسم "مي تو" الهندي العديد من قصص التحرش المزعومة وكانت أكبر شخصية ورد ذكرها عليه الصحفي والسيناريست الشهير إم جي أكبر، والذي استقال من منصبه في وزارة الخارجية الهندية بعد الاتهامات العديدة التي وجهت إليه بالتحرش ببعض النساء.
رفضت محكمة فيدرالية في لوس أنجليس دعوى بالتحرش الجنسي رفعتها الممثلة الأمريكية آشلي جاد ضد المنتج السينمائي الأمريكي الشهير هارفي واينستين.
وحكم القاضي، فيليب غوتيريز، بأن ادعاءات جاد لم تندرج ضمن النظام القانوني الأساسي الذي قدمت من خلاله الدعوى لمقاضاة واينستين، المنتج الحائز على جائزة أوسكار.
إلا أن القاضي قال إن دعوى التشهير، التي قالت فيها جاد إن واينستين أفسد عليها مشوارها المهني، يمكنها أن تستمر.
وينفي واينستين كل الاتهامات بالتحرش والابتزاز الجنسي.
وكانت دعوى التحرش الجنسي التي تقدمت بها جاد، قد أعيد رفعها بعد تغيير طرأ على النظام القانوني في ولاية كاليفورنيا، ما أدى لرفض طلبها الأول من قبل القاضي غوتيريز في سبتمبر/ أيلول الماضي.
وتقول جاد إنها رفضت تصرفات غير مرغوب فيها من جانبه، وإنه حاول بعد ذلك تدمير مشوارها المهني.
إلا أن القاضي غوتيريز ذكر في بيان أن القانون الذي يتعامل مع السلوكيات الجنسية غير اللائقة، والذي جرى تعديله ليشمل المنتجين والمخرجين، ينص على أنه لا ينطبق في العلاقات الرسمية بأثر رجعي على الدعوى التي رفعتها جاد.
ورحبت فيليس كابفيرستين، ممثلة الدفاع عن واينستين، بقرار القاضي، وقالت في بيان: "قلنا منذ البداية إن هذه الدعوى لم يكن لها ما يبررها، ونحن سعداء بأن المحكمة نظرت إلى الأمر بنفس الطريقة. نحن واثقون من أننا سننتصر في النهاية على جميع مزاعمها الأخرى".
إلا أن القاضي غوتيريز قال إن دعوى جاد بأن واينستين صوت ضدها بعد أن رفضت مجاراته لا تزال قائمة.
إذ أن ذلك الجزء من الدعوى التي قدمتها الممثلة الأمريكية يذكر أن "واينستين استخدم سلطته في مجال صناعة الترفيه لإلحاق ضرر بسمعة جاد وتحجيم قدرتها على إيجاد عمل".
ففي عام 2017، قال المخرج النيوزيلندي بيتر جاكسون مخرج سلسلة أفلام "لورد أوف ذا رينجز" أو "سيد الخواتم" إنه كان يفكر في منح جاد دورا في أحد أفلامه عام 2002، إلا أنها "وضعت على القائمة السوداء" بعد مناقشات مع شركة واينستين.
وأضاف أن واينستين حذره من أن العمل مع جاد هو بمثابة "كابوس".
إلا أن واينستين من جانبه نفى أي دور له في اختيار فريق العمل لجاكسون، وقال إنه لم يسع لوضع عقبة في مسار جاد المهني.
ولا يزال واينستين يواجه قضية جنائية منفصلة تضم خمسة ادعاءات بالاعتداء الجنسي، بما فيها الاغتصاب. ويقول فريق الدفاع عنه إن الدعاوى المدنية يجب أن لا ينظر فيها إلى أن يخلص التحقيق الجنائي إلى نتيجة.

Thursday, December 20, 2018

"طرود وهمية" من شركة أمازون للمساعدة في ضبط اللصوص

تتعاون شركة أمازون للتجارة الإلكترونية مع الشرطة الأمريكية من أجل ضبط اللصوص، الذين يسرقون الطرود لدى تركها أمام أبواب المنازل.
وقررت الشرطة في نيوجيرسي وضع طرود وهمية، مزودة بأنظمة تتبع "جي بي إس"، أمام عدد من المنازل في المدينة، مع تثبيت كاميرات على أبوابها.
واختيرت هذه المنازل استنادا إلى احصاءات الجريمة في المدينة، وبيانات حول مواقع السرقة قدمتها شركة أمازون.
وسُرق أحد الطرود بعد 3 دقائق فقط من تركه أمام المنزل.
وقالت شركة أمازون لوكالة أسوشيتد برس: "نثمن جهود وكالات تنفيذ القانون المحلية، في مكافحة سرقة الطرود، ونلتزم بمساعدتها بكل ما بوسعنا".
وتتوقع هيئة البريد الأمريكية تسليم نحو 900 مليون طرد خلال فترة الاحتفال بعيد الميلاد.
وفي العام الماضي، أطلقت أمازون خدمة "مفتاح أمازون"، التي مكنت أصحاب المنازل ذات المفاتيح الذكية من السماح لموزعي الطرود بفتح أبواب تلك المنازل عبر تطبيق إلكتروني، وترك الطرود داخلها.
وبينما تبدو هذه الوسيلة بعيدة المنال بالنسبة للكثيرين، فإن هناك طرقا أخرى لحماية الطرود: