Monday, May 6, 2019

इसराइल-फ़लस्तीनी हिंसाः संघर्षविराम की कोशिशें भीषण झड़पें जारी

मिस्र और संयुक्त राष्ट लंबे समय के लिए संघर्ष विराम की कोशिश कर रहे थे. इसी बीच ग़ज़ा पट्टी पर झड़पें कम होने की ख़बरें भी आई हैं.
लेकिन हाल के वर्षों में ये सबसे भीषण झड़पे बताई जा रही हैं जिसमें दो दिन में चार इसराइली और 23 फ़लस्तीनियों की मौत हो गई है.
हमास टीवी स्टेशन की एक अपुष्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्षविराम के लिए दोनों पक्षों की सहमति थी लेकिन इसराइल की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय देशों ने शांति बनाए रखने की अपील की है.
इसराइल की आर्मी ने रविवार को कहा कि शनिवार से अब तक इसराइली क्षेत्र में 600 से भी अधिक रॉकेट दाग़े हैं जबकि उन्होंने इसके जवाब में 320 ठिकानों को निशाना बनाया.
रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र, क़तर और मिस्र संघर्षविराम के लिए समझौता तलाश रहे थे. सोमवार सुबह फ़लस्तीनी अधिकारियों ने बताया कि एक समझौता हुआ है.
हमास और मिस्र के अधिकारियों ने एएफपी एजेंसी को बताया कि संघर्षविराम पर सहमति बन गई है.
रविवार को इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने ग़ज़ा पट्टी में आतंकवादियों के ठिकानों पर बड़े हमले के आदेश दिए हैं.
नेतन्याहू ने कहा कि ग़ज़ा में इसराइली सेना पूरी तैयारी के साथ तैनात है. पिछले महीने संघर्षविराम पर सहमति के बाद भी संघर्ष जारी है. मिस्र और संयुक्त राष्ट्र लंबे समय के लिए संघर्षविराम की कोशिश कर रहे थे.
शुक्रवार को ग़ज़ा में नाकेबंदी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहा था. इसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की. इसराइल का कहना है कि वो चरमपंथियों के पास हथियारों को पहुँचने से रोकना चाहता है.
इसी प्रदर्शन में एक फ़लस्तीनी बंदूक़धारी ने दो इसराइली सैनिकों को सरहद पर लगी बाड़ के पास गोली मारकर ज़ख़्मी कर दिया था. इसके बाद इसराइल ने हवाई हमला कर दो चरमपंथियों को मार दिया. इसके बाद से दोनों तरफ़ से हमले जारी हैं. इसमें इसराइल के कुछ गांव भी प्रभावित हुए हैं.
उत्तरी ग़ज़ा से 10 किलोमीटर दूर अशकेलोन के अस्पताल में पिछले 24 घंटों में 100 नागरिकों को इलाज के लिए भर्ती किया गया है. इनमें से तीन की मौत हो गई है और तीन गंभीर रूप से ज़ख़्मी हैं.
चुनाव आयोग ने रमज़ान के दिनों में मतदान के लिए समय में किसी बदलाव से इनकार कर दिया है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में वकील मोहम्मद निज़ामुद्दीन पाशा और असद हयात ने रमज़ान में पड़ने वाले तीन चरण के मतदान के समय में बदलाव के लिए याचिका दायर की थी.
इस याचिका में कहा गया था कि भीषण गर्मी और रमज़ान के उपवास को देखते हुए मतदान सुबह सात बजे के बजाए सुबह साढ़े चार या पांच बजे से कराना चाहिए ताकि लोगों को कम मुश्किलें आएं.
भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने पिछले गुरुवार को चुनाव आयोग से इस मामले पर फैसला लेने का कहा था. लेकिन चुनाव आयोग ने बाक़ी के तीन चरणों में मतदान के समय सीमा में किसी बदलाव से इनकार किया है.
चुनाव आयोग के मुताबिक़ कोशिश की गई है कि चुनाव शुक्रवार को नहीं पड़े लेकिन समय सीमा में बदलाव करना संभव नहीं है.
भारत में रमज़ान मंगलवार से शुरू हो रहे हैं.
मोदी सरकार का पांच साल में ख़राब प्रदर्शन- मनमोहन सिंह
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार के पांच साल के कामकाज की आलोचना की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में मनमोहन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर मोदी सरकार का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है क्योंकि पांच सालों में आतंकवाद की घटनाएं काफ़ी बढ़ी हैं.
उन्होंने मोदी सरकार के कार्यकाल को युवाओं, किसानों, व्यापारियों और हर संवैधानिक संस्था के लिए दर्दनाक और विनाशकारी बताया.

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